हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.51.6

मंडल 5 → सूक्त 51 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 51
इन्द्र॑श्च वायवेषां सु॒तानां॑ पी॒तिम॑र्हथः । ताञ्जु॑षेथामरे॒पसा॑व॒भि प्रयः॑ ॥ (६)
हे वायु! तुम और इंद्र इस सोमरस को पीने की योग्यता रखते हो. तुम निर्बाध होकर सोमरस का सेवन करो एवं इसी के उद्देश्य से यहां आओ. (६)
O air! You and Indra have the ability to drink this somras. You consume somras uninterrupted and come here for the purpose of this. (6)