हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.51.8

मंडल 5 → सूक्त 51 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 51
स॒जूर्विश्वे॑भिर्दे॒वेभि॑र॒श्विभ्या॑मु॒षसा॑ स॒जूः । आ या॑ह्यग्ने अत्रि॒वत्सु॒ते र॑ण ॥ (८)
हे अग्नि! तुम समस्त देवों के साथ आओ एवं अश्चिनीकुमारों तथा उषा के साथ मित्रता स्थापित करो. तुम यज्ञ में आकर सोमरस द्वारा उसी प्रकार प्रसन्न बनो, जिस प्रकार अत्रि ऋषि प्रसन्नता प्राप्त करते हैं. (८)
O agni! You come with all the gods and make friends with the Ashchinikumars and Usha. Come to the yajna and be pleased with the somras in the same way as the sages of Atri attain happiness. (8)