हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.55.9

मंडल 5 → सूक्त 55 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 55
मृ॒ळत॑ नो मरुतो॒ मा व॑धिष्टना॒स्मभ्यं॒ शर्म॑ बहु॒लं वि य॑न्तन । अधि॑ स्तो॒त्रस्य॑ स॒ख्यस्य॑ गातन॒ शुभं॑ या॒तामनु॒ रथा॑ अवृत्सत ॥ (९)
हे मरुतो! हमें सुखी बनाओ. हमें कोप से नष्ट मत करो, अपितु हमारे सुख का विस्तार करो. हमारी स्तुति सुनकर तुम हमारे प्रति मित्रता का भाव बनाओ. पानी की ओर चलने वाले मरुतों का रथ सबसे पीछे रहता है. (९)
O Maruto! Make us happy. Don't destroy us with wrath, but expand our happiness. By listening to our praise, make you a sense of friendship towards us. The chariot of the maruts walking towards the water remains at the back. (9)