हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.56.2

मंडल 5 → सूक्त 56 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 56
यथा॑ चि॒न्मन्य॑से हृ॒दा तदिन्मे॑ जग्मुरा॒शसः॑ । ये ते॒ नेदि॑ष्ठं॒ हव॑नान्या॒गम॒न्तान्व॑र्ध भी॒मसं॑दृशः ॥ (२)
हे अग्नि! जिस प्रकार तुम हृदय में मरुतों के प्रति पूजा का भाव रखते हो, उसी प्रकार वे हमारे समीप शुभकामनाएं लेकर आवें. जो केवल पुकार सुनकर तुम्हारे समीप आ जाते हैं, ऐसे भयानक दीखने वाले मरुतों को हव्य देकर बढ़ाओ. (२)
O agni! Just as you have a sense of worship for the Maruts in your heart, so may they bring good wishes to Us. Those who come close to you only when you hear the call, raise up such terrible-looking maruts by giving them a greeting. (2)