हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.58.1

मंडल 5 → सूक्त 58 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 58
तमु॑ नू॒नं तवि॑षीमन्तमेषां स्तु॒षे ग॒णं मारु॑तं॒ नव्य॑सीनाम् । य आ॒श्व॑श्वा॒ अम॑व॒द्वह॑न्त उ॒तेशि॑रे अ॒मृत॑स्य स्व॒राजः॑ ॥ (१)
आज हम मरुतों के तेजस्वी, स्तुतियोग्य, अत्यंत नवीन, शीघ्रगामी अश्वों वाले, शक्ति की अधिकता के कारण सब जगह पहुंचने वाले, जल के स्वामी एवं प्रभासंपन्न गण की स्तुति करते हैं. (१)
Today, we praise the bright, praiseworthy, the most innovative, the quick-moving horses of the maruts, those who reach everywhere because of the abundance of power, the masters of water and the lordly people. (1)