हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.59.8

मंडल 5 → सूक्त 59 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 59
मिमा॑तु॒ द्यौरदि॑तिर्वी॒तये॑ नः॒ सं दानु॑चित्रा उ॒षसो॑ यतन्ताम् । आचु॑च्यवुर्दि॒व्यं कोश॑मे॒त ऋषे॑ रु॒द्रस्य॑ म॒रुतो॑ गृणा॒नाः ॥ (८)
धरती और आकाश हमारी संख्या की वृद्धि के लिए वर्षा करें. विचित्र दान करने वाली उषा हमारी भलाई के लिए यत्न करे. हे ऋषि! ये रुद्रपुत्र मरुद्गण तुम्हारी स्तुतियां स्वीकार करके आकाश से वर्षा नीचे गिरावें. (८)
Let the earth and sky rain for the growth of our numbers. Let usha, the strange donor, strive for our well-being. O sage! May these Rudraputra deserts accept your praises and let the rain fall down from the sky. (8)