हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.61.4

मंडल 5 → सूक्त 61 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 61
परा॑ वीरास एतन॒ मर्या॑सो॒ भद्र॑जानयः । अ॒ग्नि॒तपो॒ यथास॑थ ॥ (४)
हे वीर! मानव हितकारी एवं शोभन जन्म वाले मरुतो! तुम्हारा रंग तपे हुए अग्नि के समान है. (४)
Oh, brave! Human-benevolent and blessed marutos ! Your color is like a glowing agni. (4)