ऋग्वेद (मंडल 5)
परा॑ वीरास एतन॒ मर्या॑सो॒ भद्र॑जानयः । अ॒ग्नि॒तपो॒ यथास॑थ ॥ (४)
हे वीर! मानव हितकारी एवं शोभन जन्म वाले मरुतो! तुम्हारा रंग तपे हुए अग्नि के समान है. (४)
Oh, brave! Human-benevolent and blessed marutos ! Your color is like a glowing agni. (4)