हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.69.2

मंडल 5 → सूक्त 69 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 69
इरा॑वतीर्वरुण धे॒नवो॑ वां॒ मधु॑मद्वां॒ सिन्ध॑वो मित्र दुह्रे । त्रय॑स्तस्थुर्वृष॒भास॑स्तिसृ॒णां धि॒षणा॑नां रेतो॒धा वि द्यु॒मन्तः॑ ॥ (२)
हे मित्र व वरुण! तुम्हारी आज्ञा से गाएं दुधारू होती हैं एवं नदियां मधुर जल देती हैं. तुम्हारी कृपा से जल बरसाने वाले, जल धारण करने वाले एवं तेजस्वी अग्नि, वायु, आदित्य देव धरती, आकाश एवं स्वर्ग के स्वामी बनते हैं. (२)
Oh my friend and Varun! By your command, the cows are milch and the rivers give sweet water. By your grace, those who rain water, hold water and become the masters of the glorious agni, the air, the aditya god, the earth, the sky and the heaven. (2)