हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.69.4

मंडल 5 → सूक्त 69 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 69
या ध॒र्तारा॒ रज॑सो रोच॒नस्यो॒तादि॒त्या दि॒व्या पार्थि॑वस्य । न वां॑ दे॒वा अ॒मृता॒ आ मि॑नन्ति व्र॒तानि॑ मित्रावरुणा ध्रु॒वाणि॑ ॥ (४)
हे दिव्य, अदितिपुत्र एवं स्वर्ग तथा भूलोक को धारण करने वाले मित्र व वरुण! हम तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम्हारे ध्रुवकार्यों को मरणरहित इंद्र आदि देव भी नष्ट नहीं कर सकते हैं. (४)
O divine, the son of Aditi and the friends of heaven and bhoolka and Varuna! We praise you. Even indra etc. dev, without death, cannot destroy your polemical works. (4)