हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.7.1

मंडल 5 → सूक्त 7 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 7
सखा॑यः॒ सं वः॑ स॒म्यञ्च॒मिषं॒ स्तोमं॑ चा॒ग्नये॑ । वर्षि॑ष्ठाय क्षिती॒नामू॒र्जो नप्त्रे॒ सह॑स्वते ॥ (१)
हे मित्ररूप ऋत्विजो! तुम यजमानों के कल्याण के निमित्त अत्यंत वृद्धिप्राप्त, बल के पुत्र एवं शक्तिशाली अग्नि के लिए अन्न एवं स्तुति प्रदान करो. (१)
O friend, Ritvizzo! You provide food and praise for the most advanced, the son of strength and the mighty agni for the welfare of the hosts. (1)