हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.73.2

मंडल 5 → सूक्त 73 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 73
इ॒ह त्या पु॑रु॒भूत॑मा पु॒रू दंसां॑सि॒ बिभ्र॑ता । व॒र॒स्या या॒म्यध्रि॑गू हु॒वे तु॒विष्ट॑मा भु॒जे ॥ (२)
हे बहुत से यजमानों को संतुष्ट करने वाले, अनेक यज्ञकर्मो को धारण करने वाले, वरण करने योग्य तथा अन्यों द्वारा न रोके जाने वाले अश्विनीकुमारो! मैं तुम्हारे समीप आता हूं. मैं बुम दोनों को अपनी रक्षा के लिए अपने यज्ञ में बुलाता हूं. (२)
O Ashwinikumaro, who satisfies many hosts, who possesses many yagnakarmas, is worthy of choice, and is not stopped by others! I'm coming close to you. I call both of them to my yajna to protect myself. (2)