हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.75.4

मंडल 5 → सूक्त 75 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 75
सु॒ष्टुभो॑ वां वृषण्वसू॒ रथे॒ वाणी॒च्याहि॑ता । उ॒त वां॑ ककु॒हो मृ॒गः पृक्षः॑ कृणोति वापु॒षो माध्वी॒ मम॑ श्रुतं॒ हव॑म् ॥ (४)
हे धन बरसाने वाले अश्चिनीकुमारो! मुझ उत्तम स्तोता की वाणीरूपी स्तुति तुम्हारे लिए बनाई गई है. तुम दोनों को खोजने वाला महान्‌ यजमान तुम्हें हव्य प्रदान करता है. हे मधुविद्या जानने वाले अश्विनीकुमारो! तुम मेरी पुकार सुनो. (४)
O aschinikumaro who showers money! The voicelike praise of my best hymn has been made for you. The great host who finds both of you gives you a gift. O Ashwinikumaro who knows madhuvidya! You listen to my call. (4)