ऋग्वेद (मंडल 5)
आ वां॑ नरा मनो॒युजोऽश्वा॑सः प्रुषि॒तप्स॑वः । वयो॑ वहन्तु पी॒तये॑ स॒ह सु॒म्नेभि॑रश्विना॒ माध्वी॒ मम॑ श्रुतं॒ हव॑म् ॥ (६)
हे नेता अश्विनीकुमारो! तुम्हारी इच्छा मात्र से रथ में जुड़ने वाले, विचित्र रूप वाले एवं शीघ्र चलने वाले घोड़े तुम्हें ठाट-बाट के साथ सोमरस पीने के लिए यहां लावें. हे मधुविद्या जानने वाले अश्चिनीकुमारो! तुम मेरी पुकार सुनो. (६)
O leader Ashwinikumaro! Just by your will, may the horses that join the chariot, with a strange look and a quick walk, bring you here to drink somras with a sigh of relief. O aschinikumaro who knows madhuvidya! You listen to my call. (6)