ऋग्वेद (मंडल 5)
उ॒ता या॑तं संग॒वे प्रा॒तरह्नो॑ म॒ध्यंदि॑न॒ उदि॑ता॒ सूर्य॑स्य । दिवा॒ नक्त॒मव॑सा॒ शंत॑मेन॒ नेदानीं॑ पी॒तिर॒श्विना त॑तान ॥ (३)
हे अश्विनीकुमारो! तुम दोनों ब्रह्ममुहूर्त में, प्रातः, दोपहर के समय, अपराह्णकाल में, रात में, दिन में अथवा किसी भी सुविधाजनक समय में आकर सुख देने वाली रक्षा करो. इस समय अश्चिनीकुमारों के अतिरिक्त कोई सोमरस नहीं पी सकता. (३)
O Ashwinikumaro! Both of you come to brahmamuhurta, in the morning, in the afternoon, in the unseasonal period, at night, in the day or at any convenient time. At this time, no somras can drink other than the ashchinikumaras. (3)