ऋग्वेद (मंडल 5)
या सु॑नी॒थे शौ॑चद्र॒थे व्यौच्छो॑ दुहितर्दिवः । सा व्यु॑च्छ॒ सही॑यसि स॒त्यश्र॑वसि वा॒य्ये सुजा॑ते॒ अश्व॑सूनृते ॥ (२)
हे स्वर्ग की पुत्री उषा! तुमने शुचद्रथ के पुत्र सुनीथि का अंधकार भगाया था. हे शक्तिशालिनी, शोभन जन्म वाली एवं अश्वप्रद स्तुतियुक्त उषा! तुम सत्यश्रवा का अंधकार मिटाओ. (२)
O daughter of heaven Usha! You drove away the darkness of Sunethi, son of Shuchadratha. O Shaktishalini, Usha with a beautiful birth and reverential praise! You remove the darkness of the truth. (2)