ऋग्वेद (मंडल 5)
अस्य॒ हि स्वय॑शस्तरं सवि॒तुः कच्च॒न प्रि॒यम् । न मि॒नन्ति॑ स्व॒राज्य॑म् ॥ (२)
सविता देव के स्वयंसिद्ध, परम प्रसिद्ध एवं सर्वप्रिय ऐश्वर्य को कोई नष्ट नहीं कर सकता. (२)
No one can destroy the axiom, the most famous and the all-loving splendor of Savita Dev. (2)