हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.85.7

मंडल 5 → सूक्त 85 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 85
अ॒र्य॒म्यं॑ वरुण मि॒त्र्यं॑ वा॒ सखा॑यं वा॒ सद॒मिद्भ्रात॑रं वा । वे॒शं वा॒ नित्यं॑ वरु॒णार॑णं वा॒ यत्सी॒माग॑श्चकृ॒मा शि॒श्रथ॒स्तत् ॥ (७)
हे वरुण! दान देने वाले, मित्र, सखा, भ्राता, पड़ोसी एवं गूंगे के प्रति किए गए हमारे अपराध को नष्ट करो. (७)
Hey Varun! Destroy our sin against the givers, the friends, the friend, the brother-in-law, the neighbor and the dumb. (7)