हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.9.3

मंडल 5 → सूक्त 9 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 9
उ॒त स्म॒ यं शिशुं॑ यथा॒ नवं॒ जनि॑ष्टा॒रणी॑ । ध॒र्तारं॒ मानु॑षीणां वि॒शाम॒ग्निं स्व॑ध्व॒रम् ॥ (३)
भोजन के पाक द्वारा मानवों का पोषण करने वाले एवं यज्ञ को सुशोभित करने वाले अग्नि को दोनों अरणियां नए बालक के समान जन्म देती हैं. (३)
The agni that nourishes humans and beautifies the yagna through the cooking of food gives birth to the agni like a new child. (3)