ऋग्वेद (मंडल 6)
नू न॑श्चि॒त्रं पु॑रु॒वाजा॑भिरू॒ती अग्ने॑ र॒यिं म॒घव॑द्भ्यश्च धेहि । ये राध॑सा॒ श्रव॑सा॒ चात्य॒न्यान्सु॒वीर्ये॑भिश्चा॒भि सन्ति॒ जना॑न् ॥ (५)
हे अग्नि! हम हव्यरूप अन्नधारियों को रक्षा साधनों एवं विविध अन्नों के साथ विचित्र धन दो. हमें ऐसे पुत्र दो जो धन, अन्न एवं पराक्रम द्वारा दूसरों को पराजित कर सकें. (५)
O agni! We give the riches of the people with different means of protection and various grains. Give us sons who can defeat others by money, food and power. (5)