हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.16.14

मंडल 6 → सूक्त 16 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 16
तमु॑ त्वा द॒ध्यङ्ङृषिः॑ पु॒त्र ई॑धे॒ अथ॑र्वणः । वृ॒त्र॒हणं॑ पुरंद॒रम् ॥ (१४)
हे शन्रुहंता एवं असुर-नगरनाशक अग्नि! अथर्वा ऋषि के पुत्र दध्यङ्‌ ने तुम्हें प्रज्वलित किया था. (१४)
O Shanruhanta and asura-city-destroying agni! The son of sage Atharva, Dadyang, ignited you. (14)