हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.16.17

मंडल 6 → सूक्त 16 → श्लोक 17 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 16
यत्र॒ क्व॑ च ते॒ मनो॒ दक्षं॑ दधस॒ उत्त॑रम् । तत्रा॒ सदः॑ कृणवसे ॥ (१७)
हे अग्नि! जिस किसी यजमान के प्रति तुम्हारा मन अनुग्रहपूर्ण है, उसे तुम शक्तिदायक उत्तम अन्न देते हो एवं वहीं निवास करते हो. (१७)
O agni! To any host to whom your heart is gracious, you give him the best food of strength and dwell there. (17)