ऋग्वेद (मंडल 6)
प्र वः॑ सखायो अ॒ग्नये॒ स्तोमं॑ य॒ज्ञं च॑ धृष्णु॒या । अर्च॒ गाय॑ च वे॒धसे॑ ॥ (२२)
हे मित्र ऋत्विजो! तुम यज्ञविधाता एवं शत्रुविनाशक अग्नि के प्रति यह स्तोत्र गाओ तथा हव्य दो. (२२)
Oh my friend, Ritvizo! You sing this hymn to the sacrificialism and the enemy-destroying agni and give the havya. (22)