हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.22.9

मंडल 6 → सूक्त 22 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 22
भुवो॒ जन॑स्य दि॒व्यस्य॒ राजा॒ पार्थि॑वस्य॒ जग॑तस्त्वेषसंदृक् । धि॒ष्व वज्रं॒ दक्षि॑ण इन्द्र॒ हस्ते॒ विश्वा॑ अजुर्य दयसे॒ वि मा॒याः ॥ (९)
हे दीप्तदर्शन इंद्र! तुम धरती एवं स्वर्ग में रहने वाले लोगों के स्वामी हो. हे जरा रहित इंद्र। अपने दाहिने हाथ में वज्र धारण करो एवं राक्षसों की सभी मायाओं को समाप्त करो. (९)
O Bright vision Indra! You are the lord of the people who live on earth and in heaven. O indra without a jar. Hold the thunderbolt in your right hand and put an end to all the maya of the demons. (9)