हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.23.10

मंडल 6 → सूक्त 23 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 23
ए॒वेदिन्द्रः॑ सु॒ते अ॑स्तावि॒ सोमे॑ भ॒रद्वा॑जेषु॒ क्षय॒दिन्म॒घोनः॑ । अस॒द्यथा॑ जरि॒त्र उ॒त सू॒रिरिन्द्रो॑ रा॒यो वि॒श्ववा॑रस्य दा॒ता ॥ (१०)
भरद्वाज ऋषि ने सोमरस निचुड़ जाने पर हव्यरूप धन वाले यजमान के स्वामी इंद्र की स्तुति इस प्रकार की है, जिससे इंद्र स्तुतिकर्ता को सन्मार्ग की प्रेरणा देने वाले एवं सूर्य प्रिय धन के दाता बनें. (१०)
The sage Bharadwaja has praised Indra, the lord of the host of the holy riches, when he goes to Somras Nichud, in such a way that Indra becomes the giver of inspiration to the praiseor and the giver of sun-loving wealth. (10)