हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.26.5

मंडल 6 → सूक्त 26 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 26
त्वं तदु॒क्थमि॑न्द्र ब॒र्हणा॑ कः॒ प्र यच्छ॒ता स॒हस्रा॑ शूर॒ दर्षि॑ । अव॑ गि॒रेर्दासं॒ शम्ब॑रं ह॒न्प्रावो॒ दिवो॑दासं चि॒त्राभि॑रू॒ती ॥ (५)
हे शत्रुनाशक इंद्र! तुमने प्रशंसनीय कार्य किया है. हे शूर इंद्र! तुमने शंबर असुर के सैकड़ों एवं हजारों योद्धाओं को विदीर्ण किया था. तुमने पर्वत से उत्पन्न एवं यज्ञादि कर्मो के विघातक शंबर असुर को मारा था एवं विचित्र रक्षासाधनों द्वारा दिवोदास का पालन किया था. (५)
O enemies Indra! You have done a commendable job. O Shur Indra! You scattered hundreds and thousands of warriors of shambar asuras. You had killed the Shambar Asura, born of the mountain and the destroyer of the yagnadi karma, and followed Divodas with strange means of defense. (5)