हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.38.5

मंडल 6 → सूक्त 38 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 38
ए॒वा ज॑ज्ञा॒नं सह॑से॒ असा॑मि वावृधा॒नं राध॑से च श्रु॒ताय॑ । म॒हामु॒ग्रमव॑से विप्र नू॒नमा वि॑वासेम वृत्र॒तूर्ये॑षु ॥ (५)
हे बुद्धिमान्‌, उक्त प्रकार से उत्पन्न, शत्रुओं को हराने के लिए बहुत अधिक बढ़े हुए, महान्‌ एवं उग्र इंद्र! हम युद्धों में बल, धन एवं रक्षा पाने के लिए तुम्हारी सेवा करते हैं. (५)
O wise, born in this way, too great and fierce to defeat the enemies! We serve you to gain strength, money and defense in wars. (5)