हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.42.1

मंडल 6 → सूक्त 42 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 42
प्रत्य॑स्मै॒ पिपी॑षते॒ विश्वा॑नि वि॒दुषे॑ भर । अ॒रं॒ग॒माय॒ जग्म॒येऽप॑श्चाद्दघ्वने॒ नरे॑ ॥ (१)
हे अध्वर्युगण! पीने के इच्छुक, सब कुछ जानने वाले, अधिक गतिशील, यज्ञों में उपस्थित रहने वाले, सबसे आगे चलने वाले एवं युद्ध के नेता इंद्र को सोमरस दो. (१)
O teacher! Give somras to Indra, who is willing to drink, who knows everything, who is more dynamic, who is present in yagnas, who is at the forefront and the leader of the war. (1)