हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.46.11

मंडल 6 → सूक्त 46 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 46
अध॑ स्मा नो वृ॒धे भ॒वेन्द्र॑ ना॒यम॑वा यु॒धि । यद॒न्तरि॑क्षे प॒तय॑न्ति प॒र्णिनो॑ दि॒द्यव॑स्ति॒ग्ममू॑र्धानः ॥ (११)
हे इंद्र! इस समय तुम हमारे वृद्धिकर्ता बनो. जब आकाश में पंखों वाले, तेज नोक वाले एवं चमकीले बाण गिरते हैं, उस समय जो हमारी रक्षा करता है, तुम उसकी रक्षा करो. (११)
O Indra! At this time you become our enhancer. When the winged, sharp-pointed and bright arrows fall in the sky, you protect the one who protects us at that time. (11)