ऋग्वेद (मंडल 6)
अ॒ग॒व्यू॒ति क्षेत्र॒माग॑न्म देवा उ॒र्वी स॒ती भूमि॑रंहूर॒णाभू॑त् । बृह॑स्पते॒ प्र चि॑कित्सा॒ गवि॑ष्टावि॒त्था स॒ते ज॑रि॒त्र इ॑न्द्र॒ पन्था॑म् ॥ (२०)
हे देवो! हम घूमतेघूमते गो-संचाररहित स्थान में आ गए हैं. यहां की विस्तृत धरती दस्यजुनों को आनंद देती है. हे बृहस्पति! तुम गायों को खोजने में हमें प्रेरणा दो. हे इंद्र! इस प्रकार दुःख अनुभव करते हुए स्तोता को मार्ग बताओ. (२०)
Oh, God! We have come to a moving go-uncommunicated place. The vast earth here gives joy to the Dyajunas. O Jupiter! You inspire us in finding cows. O Indra! Thus tell the way to The Psalms while experiencing grief. (20)