ऋग्वेद (मंडल 6)
महि॒ राधो॑ वि॒श्वज॑न्यं॒ दधा॑नान्भ॒रद्वा॑जान्सार्ञ्ज॒यो अ॒भ्य॑यष्ट ॥ (२५)
सबकी भलाई के लिए महान् धन धारण करने वाले भरद्वाजगोत्रीय ऋषियों की सृंजयपुत्र पुस्तोक ने पूजा की थी. (२५)
The Bhardwajagotrian sages, who held great wealth for the good of all, were worshipped by Srinjayputra Pustok. (25)