हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.47.8

मंडल 6 → सूक्त 47 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 47
उ॒रुं नो॑ लो॒कमनु॑ नेषि वि॒द्वान्स्व॑र्व॒ज्ज्योति॒रभ॑यं स्व॒स्ति । ऋ॒ष्वा त॑ इन्द्र॒ स्थवि॑रस्य बा॒हू उप॑ स्थेयाम शर॒णा बृ॒हन्ता॑ ॥ (८)
हे विद्वान्‌ इंद्र! हमें विस्तीर्ण स्वर्ग में ले चलो. वह स्वर्ग प्रकाशपूर्ण एवं भयरहित है. हे शक्तिशाली इंद्र! हम तुम्हारी सुंदर एवं दृढ़ भुजाओं पर अपनी रक्षा के लिए भरोसा करते हैं. (८)
O scholar Indra! Let's take us to the vast heaven. That heaven is light and without fear. O mighty Indra! We rely on your beautiful and firm arms to protect you. (8)