हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.50.4

मंडल 6 → सूक्त 50 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 50
आ नो॑ रु॒द्रस्य॑ सू॒नवो॑ नमन्ताम॒द्या हू॒तासो॒ वस॒वोऽधृ॑ष्टाः । यदी॒मर्भे॑ मह॒ति वा॑ हि॒तासो॑ बा॒धे म॒रुतो॒ अह्वा॑म दे॒वान् ॥ (४)
हे निवासस्थान देने वाले एवं पराजित न होने वाले रुद्रपुत्र मरुद्गण! इस समय बुलाने पर तुम हमारे पास आओ. वे युद्ध में महान्‌ सुख देने वाले हैं. इस कारण हम उन्हें बुलाते हैं. (४)
O the rudraputra marudgans who give the abode and are not defeated! At this time you come to us on the call. They are great pleasures in war. That's why we call them. (4)