हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.50.8

मंडल 6 → सूक्त 50 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 50
आ नो॑ दे॒वः स॑वि॒ता त्राय॑माणो॒ हिर॑ण्यपाणिर्यज॒तो ज॑गम्यात् । यो दत्र॑वाँ उ॒षसो॒ न प्रती॑कं व्यूर्णु॒ते दा॒शुषे॒ वार्या॑णि ॥ (८)
रक्षा करने वाले, हाथ में सोना लिए हुए एवं यज्ञपात्र सविता हमारे यज्ञ में भली-भांति आवें. वे हव्यदाता यजमान को उषा के समान उज्ज्वल धन देते हैं. (८)
The protectors, with gold in their hands and the sacrificial sinner Savita should come well into our yajna. They give the havandata host as bright money as Usha. (8)