ऋग्वेद (मंडल 6)
स्तो॒त्रमिन्द्रो॑ म॒रुद्ग॑ण॒स्त्वष्टृ॑मान्मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । इ॒मा ह॒व्या जु॑षन्त नः ॥ (११)
इंद्र, मरुद्गण, त्वष्टा, मित्र और अर्यमा हमारे स्तोत्रों और हव्यों को स्वीकार करें. (११)
Let Indra, Marudgana, Tvashta, Mitra and Aryama accept our hymns and hamas. (11)