ऋग्वेद (मंडल 6)
अव॑न्तु॒ मामु॒षसो॒ जाय॑माना॒ अव॑न्तु मा॒ सिन्ध॑वः॒ पिन्व॑मानाः । अव॑न्तु मा॒ पर्व॑तासो ध्रु॒वासोऽव॑न्तु मा पि॒तरो॑ दे॒वहू॑तौ ॥ (४)
उत्पन्न होने वाली उषाएं मेरी रक्षा करें. विस्तृत नदियां मेरी रक्षा करें. स्थिर पर्वत मेरी रक्षा करें. यज्ञ में उपस्थित पितर मेरी रक्षा करें. (४)
Protect me from the ushas that arise. The wide rivers protect me. Steady mountains protect me. Let the father present in the yagna protect me. (4)