हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.53.4

मंडल 6 → सूक्त 53 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 53
वि प॒थो वाज॑सातये चिनु॒हि वि मृधो॑ जहि । साध॑न्तामुग्र नो॒ धियः॑ ॥ (४)
हे उग्र पूषा! अन्नलाभ के लिए सब रास्ते साफ करो, बाधकों को नष्ट करो एवं हमारा यज्ञकार्य पूरा करो. (४)
O furious God! Clear all the way to the annalaam, destroy the obstacles and complete our yajna. (4)