ऋग्वेद (मंडल 6)
वि प॒थो वाज॑सातये चिनु॒हि वि मृधो॑ जहि । साध॑न्तामुग्र नो॒ धियः॑ ॥ (४)
हे उग्र पूषा! अन्नलाभ के लिए सब रास्ते साफ करो, बाधकों को नष्ट करो एवं हमारा यज्ञकार्य पूरा करो. (४)
O furious God! Clear all the way to the annalaam, destroy the obstacles and complete our yajna. (4)