हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.54.3

मंडल 6 → सूक्त 54 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 54
पू॒ष्णश्च॒क्रं न रि॑ष्यति॒ न कोशोऽव॑ पद्यते । नो अ॑स्य व्यथते प॒विः ॥ (३)
पूषा का चक्ररूप आयुध कभी समाप्त नहीं होता. इसका कोश कभी खाली नहीं होता. इसकी धार भोथरी नहीं होती. (३)
The chakraform armament of the pusha never ends. Its shell is never empty. Its edge is not hollow. (3)