ऋग्वेद (मंडल 6)
पू॒षणं॒ न्व१॒॑जाश्व॒मुप॑ स्तोषाम वा॒जिन॑म् । स्वसु॒र्यो जा॒र उ॒च्यते॑ ॥ (४)
हम बकरेरूपी घोड़ों वाले एवं अन्नस्वामी पूषा की स्तुति करते हैं. वे अपनी बहिन उषा के प्रेमी कहलाते हैं. (४)
We praise the goat-like-horse and annaswami pusha. He is called the lover of his sister Usha. (4)