ऋग्वेद (मंडल 6)
उ॒त स्या नः॒ सर॑स्वती घो॒रा हिर॑ण्यवर्तनिः । वृ॒त्र॒घ्नी व॑ष्टि सुष्टु॒तिम् ॥ (७)
प्रसिद्ध, शत्रुओं को डराने वाली सोने के रथ वाली एवं शत्रुओं को मारने वाली सरस्वती हमारी शोभनस्तुति की अभिलाषा करें. (७)
The famous, the golden chariot that scares the enemies and the one who kills the enemies, may Saraswati desire our adornment. (7)