ऋग्वेद (मंडल 6)
स्तु॒षे नरा॑ दि॒वो अ॒स्य प्र॒सन्ता॒श्विना॑ हुवे॒ जर॑माणो अ॒र्कैः । या स॒द्य उ॒स्रा व्युषि॒ ज्मो अन्ता॒न्युयू॑षतः॒ पर्यु॒रू वरां॑सि ॥ (१)
मैं स्वर्ग के नेता एवं भुवन के स्वामी अश्विनीकुमारों की स्तुति करता हूं एवं मंत्रों द्वारा उनकी प्रशंसा करता हुआ उन्हें बुलाता हूं. वे तुरंत शत्रुओं का निवारण करते हैं तथा रात्रि की समाप्ति पर धरती को ढकने वाला अंधेरा दूर करते हैं. (१)
I praise the leader of heaven and Lord Ashwinikumaras of Bhuvan and call them by praising them with mantras. They immediately remove the enemies and remove the darkness that covers the earth at the end of the night. (1)