हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.69.5

मंडल 6 → सूक्त 69 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 69
इन्द्रा॑विष्णू॒ तत्प॑न॒याय्यं॑ वां॒ सोम॑स्य॒ मद॑ उ॒रु च॑क्रमाथे । अकृ॑णुतम॒न्तरि॑क्षं॒ वरी॒योऽप्र॑थतं जी॒वसे॑ नो॒ रजां॑सि ॥ (५)
हे इंद्र एवं विष्णु! तुम सोम के नशे में महान्‌ कर्म करते हो, अंतरिक्ष को विस्तृत बनाते हो एवं लोगों को हमारे जीवन में उपयोगी बनाते हो. ये सब कर्म प्रशंसा के योग्य हैं. (५)
O Indra and Vishnu! You do great deeds in the intoxication of Mon, broaden the space and make people useful in our lives. All these deeds are worthy of praise. (5)