ऋग्वेद (मंडल 6)
उ॒भा जि॑ग्यथु॒र्न परा॑ जयेथे॒ न परा॑ जिग्ये कत॒रश्च॒नैनोः॑ । इन्द्र॑श्च विष्णो॒ यदप॑स्पृधेथां त्रे॒धा स॒हस्रं॒ वि तदै॑रयेथाम् ॥ (८)
हे विजयी इंद्र एवं विष्णु! तुम कभी हारते नहीं हो. इन दोनों में कोई भी हारने वाला नहीं है. तुमने जिसे तीन स्थानों पर स्थित किया एवं असंख्य वस्तुओं के लिए असुरों के साथ स्पर्धा की, उसे अपने पराक्रम से पा लिया. (८)
O victorious Indra and Vishnu! You never lose. None of these two are going to lose. You have found the one whom you have located in three places and competed with the asuras for innumerable things by your might. (8)