हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.72.5

मंडल 6 → सूक्त 72 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 72
इन्द्रा॑सोमा यु॒वम॒ङ्ग तरु॑त्रमपत्य॒साचं॒ श्रुत्यं॑ रराथे । यु॒वं शुष्मं॒ नर्यं॑ चर्ष॒णिभ्यः॒ सं वि॑व्यथुः पृतना॒षाह॑मुग्रा ॥ (५)
हे इंद्र एवं सोम! तुम हमें उद्धार करने वाला, संतानयुक्त एवं प्रशंसनीय धन शीघ्र दो. हे अति शूरो! तुम मानवों में कल्याणकारी एवं शत्रुसेनाओं को हराने वाला बल बढ़ाओ. (५)
O Indra and Mon! You must give us quickly the saving, the offspring-bearing and the praiseworthy wealth. Oh, very brave! Increase the force of welfare and defeat of the enemy forces in human beings. (5)