हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.9.3

मंडल 6 → सूक्त 9 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 9
स इत्तन्तुं॒ स वि जा॑ना॒त्योतुं॒ स वक्त्वा॑न्यृतु॒था व॑दाति । य ईं॒ चिके॑तद॒मृत॑स्य गो॒पा अ॒वश्चर॑न्प॒रो अ॒न्येन॒ पश्य॑न् ॥ (३)
वैश्वानर अग्नि ही ताने-बाने को जानते हैं एवं समय-समय पर कहने योग्य बातें कहते हैं. जल के रक्षक एवं भूलोक में विचरण करने वाले अग्न सूर्यरूप से सबको देखते हुए जगत्‌ को जानते हैं. (३)
Vaishnavar agni knows the fabric and says things worth saying from time to time. The protectors of water and the agn who wander in the blook know the world by looking at everyone in the form of the sun. (3)