हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.1.10

मंडल 7 → सूक्त 1 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 1
इ॒मे नरो॑ वृत्र॒हत्ये॑षु॒ शूरा॒ विश्वा॒ अदे॑वीर॒भि स॑न्तु मा॒याः । ये मे॒ धियं॑ प॒नय॑न्त प्रश॒स्ताम् ॥ (१०)
जो लोग मेरे उत्तम यज्ञकर्म की स्तुति करते हैं, वे ही शूर नेता युद्धों में असुरों की माया को पराजित करें. (१०)
Those who praise My best sacrificial work, let the brave leaders defeat the Maya of the asuras in wars. (10)