ऋग्वेद (मंडल 7)
मा नो॑ अग्ने दुर्भृ॒तये॒ सचै॒षु दे॒वेद्धे॑ष्व॒ग्निषु॒ प्र वो॑चः । मा ते॑ अ॒स्मान्दु॑र्म॒तयो॑ भृ॒माच्चि॑द्दे॒वस्य॑ सूनो सहसो नशन्त ॥ (२२)
हे सहायक अग्नि! ऋत्विजों द्वारा अग्नियों के प्रज्वलित होने पर उनसे हमें दुःखपूर्वक मरण के लिए मत कहो. हे प्रज्वलित एवं बलपुत्र अग्नि! तुम्हारी दुर्बुद्धि भ्रम से भी हमें न प्राप्त हो. (२२)
O helper agni! Don't ask the ritelys to die when the agnis are ignited by them. O agni, the son of the agni! Let us not get even from your ill-conceived delusion. (22)