हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 102
प॒र्जन्या॑य॒ प्र गा॑यत दि॒वस्पु॒त्राय॑ मी॒ळ्हुषे॑ । स नो॒ यव॑समिच्छतु ॥ (१)
हे स्तोताओ! अंतरिक्ष के पुत्र एवं सेचन करने वाले पर्जन्य के लिए स्तुतियां गाओ. (१)
This stotao! Sing praises to the son of space and the saintly soul. (1)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 102
यो गर्भ॒मोष॑धीनां॒ गवां॑ कृ॒णोत्यर्व॑ताम् । प॒र्जन्यः॑ पुरु॒षीणा॑म् ॥ (२)
पर्जन्य देव ओषधियों, गायों, घोड़ियों एवं स्त्रियों में गर्भ धारण करते हैं. (२)
The perennial gods conceive of herbs, cows, mares and women. (2)

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 102
तस्मा॒ इदा॒स्ये॑ ह॒विर्जु॒होता॒ मधु॑मत्तमम् । इळां॑ नः सं॒यतं॑ करत् ॥ (३)
उन्हीं पर्जन्य देव के निमित्त देवों के मुखरूप अग्नि में अतिशय मधुर हव्य का होम करो. पर्जन्य हमारे लिए निश्चित अन्न दें. (३)
For the sake of the same eternal god, do the home of a very sweet human being in the agni as the face of the gods. Give us certain food. (3)