ऋग्वेद (मंडल 7)
दि॒व्या आपो॑ अ॒भि यदे॑न॒माय॒न्दृतिं॒ न शुष्कं॑ सर॒सी शया॑नम् । गवा॒मह॒ न मा॒युर्व॒त्सिनी॑नां म॒ण्डूका॑नां व॒ग्नुरत्रा॒ समे॑ति ॥ (२)
मेंढक सूखे चमड़े के समान तालाब में सोए हुए थे. स्वर्ग का जल जब उन पर बरसता है, तब वे बछड़े वाली गायों के समान शब्द करने लगते हैं. (२)
The frogs were sleeping in a pond like dry leather. When the water of heaven rains on them, they begin to say the same words as the calf cows. (2)