ऋग्वेद (मंडल 7)
अग॑न्म म॒हा नम॑सा॒ यवि॑ष्ठं॒ यो दी॒दाय॒ समि॑द्धः॒ स्वे दु॑रो॒णे । चि॒त्रभा॑नुं॒ रोद॑सी अ॒न्तरु॒र्वी स्वा॑हुतं वि॒श्वतः॑ प्र॒त्यञ्च॑म् ॥ (१)
अतिशय युवा, अपने घर में प्रज्वलित होकर दीप्त होने वाले, विस्तृत द्यावा-पृथिवी के मध्य में स्थित, विचित्र ज्वाला वाले, भली प्रकार बुलाए गए एवं सब जगह गतिशील अग्नि के समीप हम नमस्कार के साथ गमन करते हैं. (१)
Very young people, who are ignited in their homes, in the middle of the wide-ranging light-earth, with strange flames, well-called and near the moving agni everywhere, we walk with salutations. (1)
ऋग्वेद (मंडल 7)
स म॒ह्ना विश्वा॑ दुरि॒तानि॑ सा॒ह्वान॒ग्निः ष्ट॑वे॒ दम॒ आ जा॒तवे॑दाः । स नो॑ रक्षिषद्दुरि॒ताद॑व॒द्याद॒स्मान्गृ॑ण॒त उ॒त नो॑ म॒घोनः॑ ॥ (२)
अपनी महत्ता से सारे पापों को पराजित करने वाले जातवेद अग्नि यज्ञशाला में स्तुति का विषय बनते हैं. वे हमें पापों एवं निंदित कर्मो से बचावें एवं हम हवियुक्त जनों की रक्षा करें. (२)
The Jataveda, who defeats all sins by its importance, becomes a matter of praise in the Agni Yajnashala. Let them protect us from sins and sinned deeds and we may protect the people who are committed. (2)
ऋग्वेद (मंडल 7)
त्वं वरु॑ण उ॒त मि॒त्रो अ॑ग्ने॒ त्वां व॑र्धन्ति म॒तिभि॒र्वसि॑ष्ठाः । त्वे वसु॑ सुषण॒नानि॑ सन्तु यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (३)
हे अग्नि! तुम्हीं वरुण और मित्र हो. वसिष्ठगोत्रीय ऋषि स्तुतियों द्वारा तुम्हें बढ़ाते हैं. बुम में रहने वाले धन हमारे लिए सुलभ हों. तुम कल्याणकारी उपायों से हमारी रक्षा करो. (३)
O agni! You are Varun and a friend. Vasishthagotriya sages increase you by hymns. May the money living in the boom be accessible to us. You protect us from welfare measures. (3)