ऋग्वेद (मंडल 7)
अग्ने॒ भव॑ सुष॒मिधा॒ समि॑द्ध उ॒त ब॒र्हिरु॑र्वि॒या वि स्तृ॑णीताम् ॥ (१)
हे अग्नि! तुम शोभन-समिधाओं द्वारा प्रज्वलित बनो. अध्वर्यु कुश फैलावें. (१)
O agni! You become ignited by shobhan-samidahas. The adhyryu kush spreads. (1)
मंडल 7 → सूक्त 17 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation